Tuesday, July 14, 2020
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जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक परिचय


जीवन परिचय – छायावादी युग के प्रवर्तक महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के एक संपन्न वैश्य परिवार में सन 18 से 90 ईसवी में हुआ था उनके पिता तथा बड़े भाई बचपन से ही स्वर्गवासी हो गए थे अल्प अवस्था में ही लाड प्यार से पहले प्रसाद जी को घर का सारा भार बहन करना पड़ा उन्होंने विद्यालय शिक्षा छोड़कर घर पर ही हिंदी अंग्रेजी बांग्ला संस्कृति आदि भाषाओं का ज्ञान अर्जन किया अपने पैतृक कार्य को करते हुए कभी उन्होंने अपने भीतर काव्य प्रेरणा को जीवित रखा जब भी समय मिलता उनका मन भावे जगत के पुष्प चिंता जिन्हें बे दुकान की वहीं के पन्नों पर सजा दिया करते थे अत्यधिक श्रम तथा जीवन के अंतिम दिनों में राजेश क्षमा से पीड़ित रहने के कारण 15 नवंबर सन 1937 ईस्वी को अल्पायु में ही उनका स्वर्गवास हो गया

जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक परिचय
साहित्यिक परिचय –  द्विवेदी युग के अपनी का बरसना का प्रारंभ करने वाले महाकवि जयशंकर प्रसाद छायावादी काव्य के जन्मदाता एवं छायावादी युग के प्रवर्तक समझे जाते हैं इनकी रचना कामायनी एक कालजई कृति है जिसमें छायावादी पर्वतीय एवं विशेषताओं का समावेश हुआ है अंतर्मुखी कल्पना अनुभूतियों की अभिव्यक्ति प्रसाद के काव्य की मुख्य विशेषता रही है प्रसाद छायावादी युग के सर्वश्रेष्ठ कवि रहे हैं प्रेम और सौंदर्य के काव्य का प्रमुख विषय है किंतु इनका दृष्टिकोण इसमें भी विशुद्ध मानवतावादी रहा है इन्होंने अपनी कविताओं में सूचना अनुभूतियों का रस शादी चित्र प्रारंभ किया और हिंदी काव्य जगत में अपनी नवीन कृति उत्पन्न कर दी इसी क्रांति ने एक नया युग का सूत्रपात किया जिसे छायावादी युग के नाम से जाना जाता है
कृतियां  -.   प्रसााद जी सर्वोत्तम मुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे उन्होंने कुल 68 रचनाएं प्रस्तुत की इनकी प्रमुख काव्यय रचनाओं का विवरण इस प्रकार है

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